इसी ग्रंथ पर पूरा पाठ्यक्रम टिका है। फलित ज्योतिष का सबसे आधारभूत और सर्वमान्य ग्रंथ — जो नियम यहाँ मिलता है, बाद के सभी ग्रंथ उसी का विस्तार करते हैं। नए विद्यार्थी को शुरुआत हमेशा यहीं से करनी चाहिए, क्योंकि बाकी सब इसी नींव पर खड़ा है।
Brihat Parashara Hora Shastra
कुंडली निर्माण, षोडश वर्ग, विंशोत्तरी दशा, समस्त योग
इसी ग्रंथ पर पूरा पाठ्यक्रम टिका है। फलित ज्योतिष का सबसे आधारभूत और सर्वमान्य ग्रंथ — जो नियम यहाँ मिलता है, बाद के सभी ग्रंथ उसी का विस्तार करते हैं। नए विद्यार्थी को शुरुआत हमेशा यहीं से करनी चाहिए, क्योंकि बाकी सब इसी नींव पर खड़ा है।
ज्योतिष है क्या, इसकी तीन शाखाएँ कौन-सी हैं, और यह पाठ्यक्रम किस परंपरा में चलता है।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 1–2
बारह भाव — जीवन के कौन-से क्षेत्र किस भाव से देखे जाते हैं।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 11–12
जन्म विवरण से लग्न तक — कुंडली बनती कैसे है, और उसे पढ़ना कैसे शुरू करें।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 3–4
सत्ताईस नक्षत्र, उनके पद और स्वामी — विंशोत्तरी दशा की नींव।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 6; लघु पाराशरी
हर भाव का स्वामी कहाँ बैठा है — फलादेश का सबसे बड़ा नियम यहीं से शुरू होता है।
लघु पाराशरी; बृहत् पराशर होरा शास्त्र अध्याय 24
कोई ग्रह जहाँ बैठा है, वहीं तक सीमित नहीं रहता — वह दूर के भावों को भी प्रभावित करता है।
बृहत् जातक अध्याय 2; बृहत् पराशर होरा शास्त्र
कर्म और भाग्य जहाँ मिलते हैं, वहीं सफलता का योग बनता है।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र — राजयोग अध्याय
कठिनाई के योग, और वे स्थितियाँ जिनमें वे टूट जाते हैं।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र; सारावली
कुंडली बताती है क्या हो सकता है; दशा बताती है कब।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र — दशा अध्याय; लघु पाराशरी
महादशा साल बताती है, अंतर्दशा महीना — यहीं से सटीक समय निकलता है।
फलदीपिका; बृहत् पराशर होरा शास्त्र
भाव कितना बलवान है, यह संख्या में नापने की पद्धति।
जातक पारिजात; बृहत् पराशर होरा शास्त्र