यह पाठ्यक्रम किन शास्त्रों से निकला है, कौन-सा ग्रंथ किस स्तर पर पढ़ाया जाता है, और उसे पढ़ने का सही क्रम क्या है।
कुंडली निर्माण, षोडश वर्ग, विंशोत्तरी दशा, समस्त योग
महर्षि पराशर · प्राचीन
ग्रहों का स्वभाव, बल, दृष्टि और उनके फल
आचार्य वराहमिहिर · छठी शताब्दी
भाव फल, गोचर, विंशोत्तरी दशा का सूक्ष्म विश्लेषण
मन्त्रेश्वर · तेरहवीं शताब्दी
विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार आरंभ के शुभ मुहूर्त
दैवज्ञ राम · सोलहवीं शताब्दी
ये सभी ग्रंथ सार्वजनिक धरोहर हैं और कई प्रकाशकों से उपलब्ध हैं। कक्षा में हम मूल श्लोक और अपनी व्याख्या पढ़ाते हैं — किसी प्रकाशित अनुवाद की नकल नहीं करते।