ज्योतिष शिक्षा

चार स्तर, छत्तीस सप्ताह

शून्य से शुरू करके परामर्श देने योग्य बनने तक।

1

ज्योतिष प्रवेशिका

राशि, ग्रह, भाव, नक्षत्र और कुंडली निर्माण। यहीं वह नींव बनती है जिस पर बाकी सब टिकेगा।

8 सप्ताह
2

फलादेश आधार

भावेश, दृष्टि, युति, विंशोत्तरी दशा, गोचर और प्रमुख योग। पहली बार पूरी कुंडली पढ़ना।

12 सप्ताह
3

व्यावसायिक ज्योतिष

षोडश वर्ग, विवाह मिलान, करियर, प्रश्न कुंडली, मुहूर्त और परामर्श की नैतिकता।

16 सप्ताह
4

विशेषज्ञता

कृष्णमूर्ति पद्धति, लाल किताब, जैमिनी सूत्र, वर्षफल — जो विषय चुनें वही।

4 सप्ताह

पाठ्यक्रम का आधार

हर मॉड्यूल किसी न किसी शास्त्र से निकला है — सुनी-सुनाई बात से नहीं।

बृहत् पराशर होरा शास्त्र पूरे पाठ्यक्रम की रीढ़ — कुंडली निर्माण, षोडश वर्ग, दशा और योग
बृहत् जातक ग्रहों का स्वभाव, बल और दृष्टि
फलदीपिका भाव फल और दशा का सूक्ष्म विश्लेषण
सारावली ग्रह युति, राजयोग और अरिष्ट योग
जातक पारिजात अष्टकवर्ग और विवाह फलादेश
मुहूर्त चिन्तामणि शुभ मुहूर्त निकालने की व्यावहारिक पद्धति