शून्य से शुरू करके परामर्श देने योग्य बनने तक।
राशि, ग्रह, भाव, नक्षत्र और कुंडली निर्माण। यहीं वह नींव बनती है जिस पर बाकी सब टिकेगा।
भावेश, दृष्टि, युति, विंशोत्तरी दशा, गोचर और प्रमुख योग। पहली बार पूरी कुंडली पढ़ना।
षोडश वर्ग, विवाह मिलान, करियर, प्रश्न कुंडली, मुहूर्त और परामर्श की नैतिकता।
कृष्णमूर्ति पद्धति, लाल किताब, जैमिनी सूत्र, वर्षफल — जो विषय चुनें वही।
हर मॉड्यूल किसी न किसी शास्त्र से निकला है — सुनी-सुनाई बात से नहीं।